अरुणा आसफ़ अली निगम महापौर/ पार्षद परिचय सूची

नाम : मा. राकेश जैन
पद : निगम पार्षद
वॉर्ड : 79-मोती गंज
नगर निगम आगरा
राज्य : उत्तर प्रदेश
पार्टी : निर्दलीय
चुनाव : 2017= 4476/2242 वोट
सम्मान :
coming soon

विवरण :

introduction 
Name :Honble  Rakesh Jain
Designation : Municipal Corporator
Ward: Name: 79-Moti Ganj
Municipal Corporation : Agra
State : Uttar Pradesh 
Eligibility: High School
Mobail No: 9412257850
Support - independents
Language : Hindi and Urdu 
Current Time 04:15 PM 
Date: Tuesday , Dec 18,2018 (IST) 
Telephone Code / Std Code: 0562 
Municipal Corporation Agra Mayor: Naveen Kumar Jain (BJP) Contact Number: 7055133344
Assembly constituency : Agra North assembly constituency 
Assembly MLA : Jagan Prasad Garg (BJP) Contact Number: 9412259181
Lok Sabha constituency : Agra parliamentary constituency 
Parliament MP : Dr. Ram Shankar Katheria (BJP) Contact Number: 05622527933
Pin Code : 282004
वार्ड न. 79-मोतीगंज  नगर निगम आगरा  के बारे में
नगर निगम वार्ड न. 79-मोतीगंज में कुल 10119 मतदाता हैं,  निकाय चुनाव 2017 में निर्दलीय समर्थित नगर निगम पार्षद पद पर माननीय राकेश जैन जी ने कुल पड़े मत संख्या 4476 में से (2242) 50.09 मत पाकर 
2 = गोपाल = भारतीय जनता पार्टी (1429) 31.93 को 813 अधिक मतों से हराकर चुनाव जीता 
3- आनन्द = बहुजन समाज पार्टी (563) 12.58 मत प्राप्त किये 
4 -जमुना प्रसाद =  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (204) 4.56 मत प्राप्त कर ४ न. पर रहे 
नगर निगम आगरा शहर के नागरिक बुनियादी ढांचे और प्रशासन के लिए ज़िम्मेदार है। यह नागरिक प्रशासनिक निकाय शहर की सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य और पार्क जैसी अन्य सार्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन करता है। एएमसी का मुखिया महापौर है। नगर निगम आगरा में कुल 1267595 मतदाता हैं, निगम में कुल 100 वार्ड हैं। निकाय चुनाव 2017 में भारतीय जनता पार्टी समर्थित नगर निगम महापौर पद पर  नवीन कुमार जैन जी ने कुल पड़े मत संख्या 509570 में से (217881) 42.77 मत पाकर बहुजन समाज पार्टी समर्थित उम्मीदवार 
2 - दिगम्बर सिंह = बहुजन समाज पार्टी (143559) 28.18 को 74322  अधिक मतों से हराकर चुनाव जीता 
3- राहुल चतुर्वेदी = समाजवादी पार्टी (49788) 9.77 मत प्राप्त कर तीसरे  न. पर रहे 
नगर निगम आगरा सार्वजनिक शिक्षा, सुधार संस्थानों, पुस्तकालयों, सार्वजनिक सुरक्षा, मनोरंजन सुविधाओं, स्वच्छता, जल आपूर्ति, स्थानीय नियोजन और कल्याण सेवाओं के लिए ज़िम्मेदार है। महापौर और काउंसिलर्स पांच साल के लिए चुने जाते हैं। आगरा एक महानगर, ज़िला शहर व तहसील है। विश्व का अजूबा ताजमहल आगरा की पहचान है और यह यमुना नदी के किनारे बसा है। आगरा २७.१८° उत्तर ७८.०२° पूर्व में यमुना नदी के तट पर स्थित है। समुद्र-तल से इसकी औसत ऊँचाई क़रीब १७१ मीटर (५६१ फ़ीट) है। आगरा उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है।
इतिहास
आगरा एक ऐतिहासिक नगर है, जिसके प्रमाण यह अपने चारों ओर समेटे हुए है। वैसे तो आगरा का इतिहास मुख्य रूप से मुगल काल से जाना जाता है लेकिन इसका सम्बन्ध महर्षि अन्गिरा से है जो १००० वर्ष ईसा पूर्व हुए थे। इतिहास में पहला ज़िक्र आगरा का महाभारत के समय से माना जाता है, जब इसे अग्रबाण या अग्रवन के नाम से संबोधित किया जाता था। कहते हैं कि पहले यह नगर आयॅग्रह के नाम से भी जाना जाता था। तौलमी पहला ज्ञात व्यक्ति था जिसने इसे आगरा नाम से संबोधित किया।
आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। आगरा मुगल साम्राजय की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे - ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल है। ये तीनों इमारतें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हैं। बाबर (मुग़ल साम्राज्य का जनक) ने यहाँ चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बाग़ों का निर्माण कराया।
दर्शनीय स्थल
ताजमहल
आगरे का ताजमहल, शाहजहाँ की प्रिय बेगम मुमताज महल का मकबरा, विश्व की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में से एक है। यह विश्व के नये ७ अजूबों में से एक है और आगरा की तीन विश्व सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। अन्य दो धरोहर आगरा किला और फतेहपुर सीकरी हैं।
1653 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। यह मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। 
आगरा का किला
आगरा का एक अन्य विश्व धरोहर स्थल है आगरा का किला। यह आगरा का एक प्रधान निर्माण है, जो शहर के बीचों बीच है। इसे कभी कभार लाल किला भी कहा जाता है। यह अकबर द्वारा 1565 में बनवाया गया था। बाद में शाहजहां द्वारा इस किले का पुनरोद्धार लाल बलुआ पत्थर से करवाया गया, व इसे किले से प्रासाद में बदला गया। यहां संगमर्मर और पीट्रा ड्यूरा नक्काशी का क्महीन कार्य किया गया है। इस किले की मुख्य इमारतों में मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जहाँगीर महल, खास महल, शीश महल एवं मुसम्मन बुर्ज आते हैं।
मुगल सम्राट अकबर ने इसे 1565 में बनवाया था, जिसमें उसके पौत्र शाहजहाँ के समय तक निर्माण कार्य बढ़ते रहे। इस किले के निषिद्ध क्षेत्रों में अंदरूनी छिपा हुआ स्वर्ग जैसा स्थान है। 
फतेहपुर सीकरी
मुगल सम्राट अकबर ने फतेहपुर सीकरी बसाई, व अपनी राजधानी वहां स्थानांतरित की। यह आगरा से 35 कि॰मी॰ दूर है। यहां अनेकों भव्य इमारतें बनवायीं। बाद में पानी की कमी के चलते, वापस आगरा लौटे। यहां भी बुलंद दरवाजा, एक विश्व धरोहर स्थल है।
एतमादुद्दौला का मकबरा
सम्राज्ञी नूरजहां ने एतमादुद्दौला का मकबरा बनवाया था। यह उसके पिता घियास-उद-दीन बेग़, जो जहाँगीर के दरबार में मंत्री भी थे, की याद में बनवाया गया था। मुगल काल के अन्य मकबरों से अपेक्षाकृत छोटा होने से, इसे कई बार श्रंगारदान भी कहा जाता है। यहां के बाग, पीट्रा ड्यूरा पच्चीकारी, व कई घटक ताजमहल से मिलते हुए हैं।
जामा मस्जिद (आगरा)
जामा मस्जिद एक विशाल मस्जिद है, जो शाहजहाँ की पुत्री, शाहजा़दी जहाँआरा बेगम़ को समर्पित है। इसका निर्माण १६४८ में हुआ था और यह अपने मीनार रहित ढाँचे तथा विशेष प्रकार के गुम्बद के लिये जानी जाती है।
चीनी का रोजा
चीनी का रोजा शाहजहाँ के मंत्री, अल्लामा अफज़ल खान शकरउल्ला शिराज़, को समर्पित है और अपने पारसी शिल्पकारी वाले चमकीले नीले रंग के गुम्बद के लिये दर्शनीय है।
मेहताब बाग
भारत का सबसे पुराना मुग़ल उद्यान, रामबाग, मुग़ल शासक बाबर ने सन् १५२८ में बनवाया था। यह उद्यान ताजम़हल से २.३४ किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है।
स्वामी बाग और दयाल बाग
स्वामीबाग समाधि हुजूर स्वामी महाराज (श्री शिव दयाल सिंह सेठ) का स्मारक/ समाधि है। यह नगर के बाहरी क्षेत्र में है, जिसे स्वामी बाग कहते हैं। वे राधास्वामी मत के संस्थापक थे। उनकी समाधि उनके अनुयाइयों के लिये पवित्र है। इसका निर्माण 1908 में आरम्भ हुआ था और कहते हैं कि यह कभी समाप्त नहीं होगा। इसमें भी श्वेत संगमर्मर का प्रयोग हुआ है। साथ ही नक्काशी व बेलबूटों के लिये रंगीन संगमर्मर व कुछ अन्य रंगीन पत्थरों का प्रयोग किया गया है। यह नक्काशी व बेल बूटे एकदम जीवंत लगते हैं। यह भारत भर में कहीं नहीं दिखते हैं। पूर्ण होने पर इस समाधि पर एक नक्काशीकृत गुम्बद शिखर के साथ एक महाद्वार होगा। इसे कभी कभार दूसरा ताज भी कहा जाता है।
सिकंदरा (अकबर का मकबरा)
आगरा किला से मात्र १३ किलोमीटर की दूरी पर, सिकंदरा में महान मुगल सम्राट अकबर का मकबरा है। यह मकबरा उसके व्यक्तित्व की पूर्णता को दर्शाता है। सुंदर वृत्तखंड के आकार में, लाल बलुआ-पत्थर से निर्मित यह विशाल मकबरा हरे भरे उद्यान के बीच स्थित है। अकबर ने स्वयं ही अपने मकबरे की रूपरेखा तैयार करवाई थी और स्थान का चुनाव भी उसने स्वयं ही किया था। अपने जीवनकाल में ही अपने मकबरे का निर्माण करवाना एक तुर्की प्रथा थी, जिसका मुगल शासकों ने धर्म की तरह पालन किया। अकबर के पुत्र जहाँगीऱ ने इस मकबरे का निर्माण कार्य १६१३ में संपन्न कराया।
मरियम मकबरा
मरियम मकबरा, अकबर की राजपूत (आमेर के राजा भारमल की पुत्री हरखू बाई) बेग़म का मकबरा है, इस बेगम को अकबर ने मरियम मकानी अर्थात संसार की माँ की उपाधि या उपनाम दिया था । यह मकबरा आगरा और सिकन्दरा के बीच में है।
आवागमन आगरा कैसे पहुचें 
शहरों के नजदीक
आगरा 5 किमी 
टुंडला 22 किमी 
शमसाबाद, आगरा 27 किलोमीटर
सदाबाद 27 किमी
तालुक के पास
आगरा 4 किलोमीटर 
खांडौली 10 किलोमीटर
बिचपुरी 12 किलोमीटर 
बाराउली अहिर 13 किलोमीटर 
एयर पोर्ट्स के पास
खेरिया हवाई अड्डे के पास 10 किलोमीटर
ग्वालियर एयरपोर्ट 117 किलोमीटर 
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 1 9 किलोमीटर 
संगानेर हवाई अड्डे के पास 252 किलोमीटर 
पर्यटक स्थलों के पास
आगरा 5 किमी 
फतेहपुर सीकरी 43 किलोमीटर 
मथुरा 52 किलोमीटर 
वृंदावन 58 किमी 
भरतपुर 59 किमी 
जिलों के पास
आगरा 5 किमी निकट
महामाया नगर 27 किमी 
फिरोज़ाबाद 41 किलोमीटर 
मथुरा 52 किलोमीटर 
रेलवे स्टेशन के पास
आगरा सिटी रेल वे स्टेशन 3.8 किलोमीटर
यमुना ब्रिज आगरा रेल वे स्टेशन 3.8 किलोमीटर 
आगरा फोर्ट रेल वे स्टेशन 5.1 किलोमीटर
राजा की मंडी रेलवे स्टेशन 4 किलोमीटर 
आगरा नगर में राजनीति
बीजेपी, एजीपी, बीएसपी,कांग्रेस इस क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक दल हैं।
आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मंडल।
आगरा
आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक जीतने का इतिहास।
2012 जगन प्रसाद गर्ग बीजेपी 68401 = 23356 राजेश कुमार अग्रवाल बीएसपी 45045
2007 जगन प्रसाद गर्ग बीजेपी 31200 = 8263 सर्व प्रकाश कपूर उर्फ शौकी भाई बसपा  22937
2002 जगन प्रसाद गर्ग बीजेपी 30515 = 1274 9 गोविंद अग्रवाल कांग्रेस17766
1998  जगन प्रसाद गर्ग एजीपी 34586 = 4772 गोविंद अग्रवाल कांग्रेस 2 9 814
1996  सत्य प्रकाश विकल बीजेपी 42533 = 19254 बंके बिहारी अग्रवाल 
1993 सत्य प्रकाश विकल बीजेपी 48055 = 23756 ओम प्रकाश जिंदल कांग्रेस 2429 9
1991  सत्य प्रकाश विकल बीजेपी 46337 = 24550 ओम प्रकाश जिंदल एस कांग्रेस 21787
1989  सत्य प्रकाश विकल बीजेपी 3 9 626 = 14503 सतीश चंद गुप्ता कांग्रेस 25123
1985 सत्य  प्रकाश विकल बीजेपी 2440 9 = 145 सतीश चंद कांग्रेस24264
1980 ओम प्रकाश जिंदल कांग्रेस 25240 = 4346 सत्य प्रकाश विकल  बीजेपी 20894
1977 सुरेंद्र कुमार कालरा (सिंधु) कांग्रेस 25472 = 556 डी प्रकाश नारायण गुप्ता जेएनपी 24916
1974 प्रकाश नारायण गुप्ता कांग्रेस 28874 = 3151 अग्रवाल सत्य प्रकाश विकल बीजेएस 25723
1969  प्रकाश नारायण गुप्ता कांग्रेस 23358 = 6018 अग्रवाल बलोजी एसएसपी 17340
1967 जेएन आर एस अग्रवाल बीजेएस 18,667 = 4450 डॉ पी एन गुप्ता कांग्रेस14217
1951 बाबू लाल माईटल कांग्रेस 25612 = 16612 कन्हैया लाल बीजेएस 9000

विकास कार्य :

निगम पार्षद जी की वार्ड विकास कार्य सूची एक वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाशित की जाएगी अभी उपलब्ध नहीं है 

अरुणा आसफ़ अली की जीवनी
पूरा नाम – अरुणा आसफ़ अली
जन्म – 16 जुलाई 1909
जन्मस्थान – कालका ग्राम, पंजाब
पिता – उपेन्द्रनाथ गांगुली
माता – अम्बालिका देवी
विवाह – आसफ़ अली

अरुणा आसफ अली का जन्म अरुणा गांगुली के नाम से 16 जुलाई 1909 को ब्रिटिश कालीन भारत में बंगाली ब्राह्मण परीवार में पंजाब के कालका ग्राम में हुआ था। उनके पिता उपेन्द्रनाथ गांगुली एक रेस्टोरेंट के मालिक थे। उनकी माता अम्बालिका देवी त्रिलोकनाथ सान्याल की बेटी थी।
उपेन्द्रनाथ गांगुली का छोटा भाई धीरेंद्रनाथ गांगुली भूतकालीन फ़िल्म डायरेक्टर थे। उनका एक और भाई नागेंद्रनाथ एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर थे जिन्होंने नोबेल प्राइज विनर रबीन्द्रनाथ टैगोर की बेटी मीरा देवी से विवाह किया था।
अरुणा की बहन पूर्णिमा बनर्जी भारत के कांस्टिटुएंट असेंबली की सदस्य है। अरुणा की पढाई लाहौर के सेक्रेड हार्ट कान्वेंट में पूरी हुई। ग्रेजुएशन के बाद कलकत्ता के गोखले मेमोरियल स्कूल में वह पढाने लगी। वहा उनकी मुलाकात आसफ अली से हुई, जो अल्लाहाबाद में कांग्रेस पार्टी की नेता थे। 1928 में अपने परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने सितम्बर 1928 में विवाह कर लिया।
आसफ अली विवाह करने और महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में शामिल होने के बाद वह कांग्रेस पार्टी की एक सक्रीय सदस्य बनी। हिंसात्मक होने की वजह से उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और इसीलिये 1931 के गांधी-इरविन करार के बावजूद उन्हें छोड़ा नही गया।
लेकिन कैद बाकी महिलाओ ने उनका साथ देते हुए कहा की वे तभी जेल छोड़ेंगे जब अरुणा आसफ अली को भी रिहा किया जायेगा। लोगो के भारी सहयोग को देखते हुए आख़िरकार अधिकारियो को अरुणा आसफ अली को रिहा करना ही पड़ा।
1932 में उन्होंने तिहार जेल में अपनी विविध मांगो को लेकर भूख हड़ताल भी की थी। उस समय तिहार जेल की स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण उनकी भूक हड़ताल से तिहार जेल में काफी सुधार हुए। बाद में वह अम्बाला चली गयी।
महात्मा गांधी के आह्वान पर हुए 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा आसफ अली ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं जब सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए तो उन्होंने अद्भुत कौशल का परिचय दिया और नौ अगस्त के दिन मुम्बई के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा झंडा फहराकर अंग्रेजों को देश छोड़ने की खुली चुनौती दे डाली।
अरुणा आसफ़ अली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थीं। उन्हें 1942 मे भारत छोडो आंदोलन के दौरान मुंबई के गोवालीया मैदान मे कांग्रेस का झंडा फहराने के लिये हमेशा याद किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद भी वह राजनीती में हिस्सा लेती रही और 1958 में दिल्ली की मेयर बनी। 1960 में उन्होंने सफलतापूर्वक मीडिया पब्लिशिंग हाउस की स्थापना की। Aruna Asaf Ali के या योगदान को देखते हुए 1997 में उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आज अरुणा आसफ अली भले ही हमारे बीच नहीं हैं। पर उनके कार्य और उनका अंदाज आने वाली पीढ़ियों को सदैव रास्ता दिखाते रहेंगें। उन्हें यूँ ही स्वतंत्रता संग्राम की ‘ग्रैंड ओल्ड लेडी‘ नहीं कहा जाता है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश के महान क्रांतिकारी अरुणा आसफ़ अली के बलिदान से युवा वर्ग राष्ट्र रक्षा का प्रण लें संस्था द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित कर सत सत नमन करते हैं , मेहनाज़ अंसारी